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21/Jan/2023

कोटा, 9 जून लॉकडाउन के दौरान कोरोना संक्रमण काल में जब मरीजों को इमरजेंसी हुई तो भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के कोरोना योद्धा कार्डियक सर्जन एवं टीम द्वारा उनका सफल ऑपरेशन कर जान बचाई। चिकित्सालय के कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा एवं उनकी टीम द्वारा कई मरीजों की गंभीर हालत में सफल हार्ट सर्जरी कर सफलता पाई है।

डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि झालावाड़ निवासी नसीम आरा (50) महिला भारत विकास में हार्ट अटैक की हालत में भर्ती हुई प्राथमिक जांच में पता चला कि महिला का क्रियटिनिन भी मात्र छह था, यानीकि महिला की किडनी भी फेल थी। ऐसी स्थिति में महिला की एजियोग्राफी भी नहीं की जा सकती थी। महिला के पास दो साल पुरानी एंजियोग्राफी व अन्य जांचें थी महिला का उन जांचों के आधार पर ऑपरेशन करना चुनौतीपूर्ण था। डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि अमूमन छह महीने पुरानी जांचों के आधार पर भी ऑपरेशन नहीं किया जाता, क्योंकि इस दौरान बीमारी बढ़ चुकी होती है।


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20/Jan/2023

कोटा (योगेश जोशी)। रंगबाड़ी स्थित मधु स्मृति संस्थान, बाल गृह के सहयोग से 17 वर्षीय निराश्रित बालक लोकेश सुमन को जीवनदान मिला है। बालक जन्मजात हृदय रोग ‘काॅन्जेन्टियल ट्राइकस्पिड वाॅल्व डिस्प्लासिया’ से ग्रसित था। मधु स्मुति संस्थान की संचालिका बृजबाला निर्भीक ने बताया कि बालक पिछले आठ माह से आवासित संस्था में निवासरत था। इसकी बीमारी के बारे में पता चलने पर बालक का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कल्याण योजना के अंतर्गत बालक का उपचार करवाने हेतु पंजीयन करवाया गया था। इस योजना के तहत गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों का उपचार सरकार की ओर से कराया जाता है। लोकेश के उपचार के लिए राज्य सरकार द्वारा बालक के उपचार में खर्च राशि की स्वीकृति प्रदान की गई। जिसके तहत 6 अप्रैल को भारत विकास परिषद चिकित्सालय में कार्डियक सर्जन डाॅ. सौरभ शर्मा व चिकित्सकों की टीम ने बालक का आॅपरेशन किया। संस्थान की संचालिका बृजबाला निर्भीक, संरक्षक हरगोविन्द निर्भीक एवं डाॅ. अंजली निर्भीक ने बालक का आॅपरेशन करने वाली चिकित्सकों की टीम का आभार प्रकट किया।
लोकश का आॅपरेशन करने वाले काॅर्डियक सर्जन डाॅ. सौरभ शर्मा ने बताया कि ‘काॅन्जेन्टियल ट्राइकस्पिड वाॅल्व डिस्प्लासिया’ एक दुर्लभ बीमारी है। जिसमें हृदय का वाल्व सुचारू रूप से काम नहीं करता। रक्त लीकेज होता है जिसकी वजह से हृदय के चैम्बर का आकार काफी बढ़ जाता है। इस बीमारी की वजह से बालक के शरीर में पानी भरना शुरू हो गया था। इसके अलावा लंग्स, लीवर और हृदय की झिल्लियों में पानी भर गया था। बालक को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। यह केस काफी जटिल था। करीब आठ घंटे तक बालक की ओपन हार्ट सर्जरी चली। इस दौरान वाल्व को बदलने की जगह प्राकृतिक वाल्व को ही रिपेयर किया गया था। जिसे ट्राइकस्पिड वाल्व कहा जाता है। मधु स्मुति संस्थान ने न्यू मेडिकल काॅलेज के सहयोग से बालक के आॅपरेशन के लिए 4 यूनिट ब्लड की व्यवस्था करवायी। बालक अभी आईसीयू में चिकित्सकों की निगरानी में है जिसे 4 दिन बाद सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा।

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20/Jan/2023

– निरीक्षक न्यूज –

कोटा, 10 अक्टूबर। भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के कार्डियक सर्जन डॉक्टर सौरभ शर्मा हार्ट सर्जरी में निरन्तर नये कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। इस बार उन्होंने एक 23 वर्षीय युवक के हार्ट की सर्जरी के लिए मात्र डेढ़ इंच का चीरा लगाकर सवा इंच का वाल्व बदलने में सफलता हासिल की है। यह एमआईसीएस तकनीक होती है, जिसके तहत हार्ट सर्जरी में छोटा चीरा लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस ऑपरेशन की खास बात यह भी है कि मरीज ऑपरेशन के दूसरे दिन बिना किसी सहारे के खुद ही चलने भी लगा है। मरीज की छाती पर देखने से ओपन हार्ट सर्जरी के लिए लगाया गया चीरा फोड़े फुंसी के लिए लगाए गए चीरे के समान ही दिखाई दे रहा है। छोटे से चीरा लगाकर ऑपरेशन करने से मरीज की रिकवरी ग्रोथ भी काफी अच्छी है।

भारत विकास परिषद चिकित्सालय के हार्ट सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि केशोरायपाटन बूंदी निवासी 23 वर्षीय युवक जितेन्द्र के वाल्व में तकलीफ थी, करीब तीन-चार साल से उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, एक फ्लोर भी सीढ़ी नहीं चढ़ पा रहा था जब वो यहां ओपीडी में दिखाने आया तो उसे देखने से लगा कि वो मिनिमल इन्वेसिव कार्डियक सर्जरी के लिए फिट है। 

उन्होंने बताया कि छोटा चीरा लगाकर सर्जरी करने से मरीज की रिकवरी बहुत अच्छी है, मरीज करवट ले रहा है, चल फिर रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसे ऑपरेशन के लिए तकनीकी गुणवत्ता का होना बेहद आवश्यक है, आसानी से ऑपरेशन करना संभव नहीं होता। इस ऑपरेशन में करीब ढाई घंटे का समय अतिरिक्त लगा।

इसलिए जटिल थी 

यह सर्जरी डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि पारंपरिक

तकनीक यानी ओपन हार्ट सर्जरी में लगभग 9 इंच लंबा चीरा लगाया जाता है। वहीं सीने की हड्डी को काटकर ऑपरेशन किया है। लेकिन इस तकनीक की मदद से केवल डेढ़ इंच चीरे से सर्जरी की गई। इससे सीने की हड्डी को नहीं काटना पड़ा और मामूली चीरे से ही सर्जरी की गई। इस केस में मरीज व तीमारदार दोनों को ज्यादा देखभाल की आवश्यकता नहीं पड़ी।

एमआईसीएस तकनीक से रोगी को ये फायदा

एमआईसीएस तकनीक में छोटे से चीरे से सर्जरी की जाती है, जिससे रोगी बहुत जल्द स्वस्थ हो जाता है। यह चीरा बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता है। साथ ही पोस्ट ऑपरेटिव दर्द, रक्तस्त्राव एवं संक्रमण का खतरा भी काफी कम होता हुआ है। है। इलाज के दौरान रोगी को हॉस्पिटल में ज्यादा दिन तक भर्ती भी नहीं रहना पड़ता। 

हाड़ौती के लिए गौरव की बात

भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के संरक्षक श्याम शर्मा ने बड़े महानगरों की तर्ज पर कोटा में हार्ट की बीमारी के निरन्तर बड़े और जटिल ऑपरेशन उच्च तकनीक एवं गुणवत्ता के साथ होना गौरव की बात है। उन्होंने भाविप के हार्ट सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा को रोगियों के उपचार में निरन्तर नये मुकाम हासिल करने के लिए शुभकामनाएं दी। 

अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने बताया कि मरीज गरीब परिवार से है, जिसका ऑपरेशन सरकारी योजना में निशुल्क हुआ है। 

उन्होंने बताया कि बड़े शहरों में उच्च तकनीक और अनुभव से होने वाले जटिल ऑपरेशन कोटा में भी होने से लोगों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी।


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20/Jan/2023

कोटा | वरिष्ठ कार्डियक सर्जन व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ शर्मा ने 2 वर्षों में 1000 कार्डियो थोरेसिक ऑ सर्जरी कर कीर्तिमान बनाया है। इनमें बाईपास, वाल्व, रेफ खून की नसों की सर्जरी, बच्चों की जटिल सर्जरी, दिल में छेद, बच्चों में जन्मजात दिल की सर्जरी, छोटे चीरे द्वारा हार्ट सर्जरी शामिल है। डॉ. शर्मा पिछले 2 वर्ष से भारत पे विकास परिषद हॉस्पिटल में हेड ऑफ दि डिपार्टमेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं।

 


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20/Jan/2023

कोटा। कोटा में मेट्रो सिटी की तर्ज पर एडवांस लेवल की हार्ट सर्जरी हो रही है। कोटा के डॉ. सौरभ शर्मा ने दुर्लभ हार्ट सर्जरी की है। जिसमें मरीज के हृदय की दोनों वाल्व बदलने के साथ ही एओटिक रूट को बड़ा कर महाधमनी आर्क ऑफ ए. ओटा का पार्ट बदलकर सिर और गले की बड़ी वेसल्स से महाधमनी का पार्ट बदलकर सिर और गले की वेसल्स को दुबारा प्रत्यारोपित किया है। इस जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक करने वाले हार्ट सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा का कहना है कि उन्होंने ऐसी सर्जरी के बारे में आज तक सुना या देखा नहीं है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि बूंदी जिले के डाबी निवासी 19 वर्षीय युवक अर्जुन को सांस लेने में तकलीफ और शारीरिक विकास नहीं होने की परेशानी थी। जांच में पता चला कि उसके माइटल वॉल में लीक था और उसकी एओटिक बॉल के उपर की महाधमनी काफी पतली थी। एओटिक वॉल बदलने से पहले वॉल्व के रूट को बड़ा किया। इसके साथ ही पूरी महाधमनी बदली।

इसके साथ सिर और गले की वेसल्स दुबारा प्रत्यारोपित किया है। सर्जरी साढ़े आठ घंटे तक चली। यह अपरेशन भारत भूमिका रही। विकास परिषद चिकित्सालय में की गई। डॉ. शर्मा के मुताबिक, यह पूरी सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी।

ऐसे केस में खून की सप्लाई को रोककर ही सर्जरी करनी होती है। अभी मरीज ठीक है।

सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. सौरभ शर्मा के अलावा कार्डियक एनेस्थेटिक डॉ. सनी केसवानी, डॉ. अंकुर दीक्षित, सीटीवीएस वार्ड इंचार्ज डॉ. महेश, फिजिशियन असिस्टेंट हिमांशु, ललित कुमार, स्क्रव नर्स अर्पित, सीनियर परफ्यूजनिस्ट प्रमोद कुमार की भूमिका रही। 

 


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20/Jan/2023

कोटा, समाचार जगत ब्यूरो । रंगबाड़ी स्थित मधु स्मृति संस्थान बाल गृह के सहयोग से 17 वर्षीय निराश्रित बालक लोकेश सुमन को जीवनदान मिला है। बालक जन्मजात हृदय रोग ‘कॉन्जेन्टियल ट्राइकस्पिड वॉल्व डिस्प्लासिया’ से ग्रसित था।

मधु स्मृति संस्थान की संचालिका बृजबाला निर्भीक ने बताया कि बालक पिछले आठ माह से आवासित संस्था में निवासरत था। इसकी बीमारी के बारे में पता चलने पर बालक का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कल्याण योजना के अंतर्गत बालक का उपचार करवाने के लिए पंजीयन करवाया गया था। 6 अप्रैल को भाविप चिकित्सालय में कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा व चिकित्सकों की टीम ने बालक का ऑपरेशन किया। कॉर्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि करीब आठ घंटे तक बालक की ओपन हार्ट सर्जरी चली। बालक अभी आईसीयू में चिकित्सकों की निगरानी में है जिसे 4 दिन बाद सामान्य वाई में शिफ्ट किया जाएगा। संस्थान को संचालिका बृजबाला निर्भीक, संरक्षक हरगोविन्द निर्भीक एवं डॉ. अंजली निर्भीक ने बालक का ऑपरेशन करने वाली चिकित्सकों की टीम का आभार प्रकट किया।

भाविप में कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ ने की ओपन हार्ट सर्जरी

कोटा।  भारत विकास परिषद चिकित्सालय में रंगबाड़ी स्थित मधु स्मृति संस्थान बालगृह के सहयोग से 17 साल के निराश्रित बालक लोकेश सुमन की हार्ट सर्जरी कर जीवन दान दिया गया। कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा व चिकित्सकों की टीम ने 8 घंटे में बालक का सफल ऑपरेशन किया। संस्थान की संचालिका बृजबाला निर्भीक, संरक्षक हरगोविन्द निर्भीक व डॉ. अंजली निर्भीक ने चिकित्सक टीम का आभार जताया। कॉर्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि बालक अभी आईसीयू में चिकित्सकों की निगरानी में है। 4 दिन बाद सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा।

मधु स्मृति संस्थान के सहयोग से लोकेश को मिला जीवनदान

आठ घंटे चली जटिल ओपन हार्ट सर्जरी

संदेश न्यूज । कोटा. रंगबाड़ी स्थित मधु स्मृति संस्थान, बाल गृह के सहयोग से 17 वर्षीय निराश्रित बालक लोकेश सुमन को जीवनदान मिला है। बालक जन्मजात हृदय रोग ‘कॉन्जेन्टियल ट्राइकस्पिड वॉल्व डिस्प्लासिया’ से ग्रसित था। मधु स्मृति संस्थान की संचालिका बृजबाला निर्भीक ने बताया कि बालक पिछले 8 माह से आवासित संस्था में निवासरत था। इसकी बीमारी के बारे में पता चलने पर बालक का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कल्याण योजना के अंतर्गत बालक का उपचार करवाने हेतु पंजीयन करवाया गया था। भारत विकास परिषद चिकित्सालय में कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा के निर्देशन में चिकित्सकों की टीम ने बालक का ऑपरेशन किया। संस्थान की संचालिका बृजबाला निर्भीक, संरक्षक हरगोविन्द निर्भीक एवं डॉ. अंजली निर्भीक ने चिकित्सकों का आभार जताया।

हार्ट के वॉल्व में थी दिक्कत

कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि यह दुर्लभ बीमारी है, जिसमें हृदय का वाल्व सुचारु रुप से काम नहीं करता है। रक्त लीकेज होता है जिसकी वजह से हृदय के चैम्बर का आकार काफी बढ़ जाता है। इसी बीमारी की वजह से बालक के शरीर में पानी भरना शुरू हो गया था। इसके अलावा लंग्स, लीवर और हृदय की झिल्लियों में पानी भर गया था। बालक को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। यह केस काफी जटिल था। करीब 8 घण्टे तक बालक की ओपन हार्ट सर्जरी चली। इस दौरान वाल्व को बदलने की जगह प्राकृतिक वाल्व को ही रिपेयर किया गया। ट्राइकस्पिड वाल्व कहा जाता है। मधु स्मृति संस्थान ने न्यू मेडिकल कॉलेज के सहयोग से बालक के ऑपरेशन के लिए 4 यूनिट ब्लड की व्यवस्था करवाई।

 

 


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20/Jan/2023

कोरोना काल मे हृदय की बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करे, जैसे छाती में दर्द, सांस का फूलना, धड़कन तेज महसूस होना। ऐसे लक्षणों मे तुरंत हॉस्पिटल जाकर जांच कराएं। अगर जांच में गंभीर बीमारी निकलती है तो ऑपरेशन से ना डरे, यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

एंजियोग्राफी में अगर क्रिटिकल लेफ्ट मैन डिसीज हो, बच्चा बार बार नीला पड़ रहा हो, पुरानी वाल्व की बीमारी के साथ धड़कन तेज हो या शरीर मे सूजन हो तो जल्दी हृदय का आपरेशन कराये। कोरोना काल मे भी इमरजेंसी कार्डियक सर्जरी करी जा रही है।


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19/Jan/2023

कोटा | भारत विकास परिषद हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने एक दुर्लभ व जटिल सर्जरी की है। कार्डियक सर्जन डॉ. सौरभ शर्मा और डॉ. अंकुर दीक्षित की टीम ने इस 16 वर्षीय मरीज की सर्जरी करके जान बचाई। 

डॉ. सौरभ ने बताया कि 16 साल का मरीज सांस की तकलीफ के साथ आया था। एचआरसीटी टेस्ट कराने पर श्वास नली के निचले सिरे पर 80 प्रतिशत स्टेनोसिस (सिकुड़न) पाया गया। जिससे मरीजको दो माह से सांस लेने में तकलीफ थी। ब्रोंकोस्कोपी जांच करने पर लगभग 6 मिमी स्टेनोटिक खंड श्वास नली के निचले सिरे पर पाया गया। एक दुर्घटना के बाद रोगी की 4 महीने पहले ट्रेकियोस्ट्रोमी हुई थी। दो महीने से रोगी को सांस लेने में तकलीफ हो रहे थी, रोगी ने इंदौर जाकर ट्रेकियल डायलेटेशन करवाया, लेकिन कोई आराम नहीं मिला। मरीज हमारे पास आया तो दो दिन पहले उसका सफल ट्रेकियल रीसक्शन एंड एनास्टोमोसिस सर्जरी की गई। रोगी का उचित वेंटिलेशन और इंट्यूबेशन बड़ी चुनौती थी, जो कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. अंकुर दीक्षित ने पूरी सफलता से दिया। 

दूसरी बड़ी चुनौती सर्जरी के दौरान लारेंजियल नसों को संरक्षित करना था। लारेंजियल नसें इंसान को बोलने में मदद करती हैं। ऐसी सर्जरी में इन्हें बड़ा खतरा होता है। इसलिए सर्जरी में खास सावधानी बरती गई और दोनों लारेंजियल नसों को संरक्षित किया गया।

 

एमआईसीएम तकनीक से डेढ़ इंच का चीरा लगाकर हार्ट का वाल्व बदला। 

कार्यालय संवाददाता कोटा, 10 अक्टूबर। भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के कार्डियक सर्जन डॉक्टर सौरभ शर्मा ने एक 23 वर्षीय युवक के हार्ट की सर्जरी के लिए मात्र डेढ़ इंच का चीरा लगाकर सवा इंच का वाल्व बदलने में सफलता हासिल की है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि यह एमआईसीएस तकनीक होती है, जिसके तहत हार्ट सर्जरी में छोटा चीरा लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस ऑपरेशन की खास बात यह भी है कि मरीज ऑपरेशन के दूसरे ही दिन बिना न टी किसी सहारे के खुद ही चलने भी लगा है। र न मरीज की छाती पर देखने से ओपन हार्ट सर्जरी के लिए लगाया गया चीरा फोड़े- य फुंसी के लिए लगाए गए चीरे के समान हो क थ र र दिखाई दे रहा है। छोटे से चीरा लगाकर ऑपरेशन करने से मरीज की रिकवरी ग्रोथ भी काफी अच्छी है। डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि केशोरायपाटन बूंदी निवासी 23 वर्षीय युवक जितेन्द्र के वाल्व में तकलीफ थी। करीब तीन-चार साल से उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। जय यो चिकित्सालय में दिखाने आया तो उसे देखने से लगा कि वो मिनिमल इन्वेसिव कार्डियक सर्जरी के लिए फिट है। उन्होंने बताया कि छोटा चीरा लगाकर सर्जरी करने से मरीज की रिकवरी बहुत अच्छी हैए मरीज करवट ले रहा है, चल फिर रहा है। पेशेंट के लिए बहुत से अच्छा ऑपरेशन रहा, उसे ज्यादा दर्द भी सहन नहीं करना पड़ रहा है। इस ऑपरेशन में करीब ढाई घंटे का समय अतिरिक्त लगा।

चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र हॉस्पिट के संरक्षक श्याम शर्मा ने कहा कि में ले र महानगरों की तर्ज पर कोटा में हार्ट की श्रीमारी के निरन्तर बड़े और जटिल बॉयोल ऑपरेशन उच्च तकनीक एवं गुणवत्ता के अस्पता साथ होना गौरव की बात है। रेजीडेंट चिकित्सालय के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने सकेंगी। कि मरीज गरीब परिवार से है जिसका ऑपरेशन सरकारी योजना में की ऐ निःशुल्क हुआ है।


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19/Jan/2023

कोटा @ पत्रिका. अब वो जमाना गया, जब कहा जाता था कि बुजुर्गों में दिल की बीमारी होती है। दिल की बीमारी किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में दिल पर सबसे अधिक बोझ है। तनाव, थकान, प्रदूषण कई वजहों से रक्त का आदान-प्रदान करने वाले इस अति महत्वपूर्ण अंग को अपना काम करने में मुश्किल होती है। 

विश्व हृदय दिवस पर हृदय की बिमारियों के प्रति सचेत करते हुए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार, भारत में 10.2 करोड़ लोग दिल के मरीज है। एक शोध के अनुसार, भारत में पिछले 15 वर्षों में हृदयाघात से मरने वालों की संख्या में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 

दिल का ख्याल रखने के लिए प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे तक व्यायाम करें। यदि समय की कमी है तो आप तेज कदमों से टहल सकते है। नमक की कम मात्रा का सेवन करें। भोजन में कम वसा वाले आहार लें। ताजी सब्जियां व फल अधिक मात्रा में लें। समय पर भोजन करें। तंबाकू जैसे पदार्थों से दूरी बनाकर रखें। घंटों एक ही स्थिति में न बैठें। रोजाना साइकिलिंग करें।




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